ग्राम पंचायत बार में फर्जी प्रस्ताव का आरोप, 2 मेगावाट सोलर पावर प्लांट की अनुमति पर उठे सवाल
बरमकेला (सारंगढ़-बिलाईगढ़)। ग्राम पंचायत बार में 2 मेगावाट ग्रिड कनेक्टेड सोलर पावर प्लांट की स्थापना को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच, उपसरपंच एवं सचिव द्वारा बिना पंचों और ग्राम सभा की जानकारी व सहमति के फर्जी तरीके से प्रस्ताव पारित कर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया। इस संबंध में ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सारंगढ़ सहित संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार दिनांक 17 अक्टूबर 2025 को ग्राम पंचायत बैठक में प्रस्ताव क्रमांक 1 में केवल मानदेय राशि आहरण पर चर्चा हुई थी, जबकि प्रस्ताव क्रमांक 2 में सोलर पावर प्लांट को लेकर किसी भी प्रकार की चर्चा नहीं हुई। इसके बावजूद बाद में प्रस्ताव पंजी में प्रस्ताव क्रमांक 2 दर्ज कर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसी तरह 13 नवंबर 2025 को ग्राम सभा की बैठक आहूत किए बिना ही कार्यवाही पंजी में औद्योगिक प्रयोजन हेतु 2 मेगावाट सोलर पावर प्लांट स्थापना संबंधी और बायोमास पेटेलट का प्रस्ताव दर्ज किए जाने का आरोप है जो की पुरा फर्जी है 17/10/2025 का सोलर का आवेदन जब 13/11/2025 को आया तो 17/10/2025 को कैसे प्रस्ताव पारित हुआ ये संदेह मे है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले की शिकायत पहले ही जनपद पंचायत बरमकेला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से की गई थी, जिस पर जांच समिति गठित कर जांच कराई गई। जांच प्रतिवेदन में भी यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित तिथियों पर ग्राम सभा की सूचना पंजी में कोई प्रविष्टि नहीं है और प्रस्ताव बिना विधिवत चर्चा के दर्ज किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि ग्राम सभा में उपस्थित सदस्यों को विषय की जानकारी नहीं दी गई और बाद में हस्ताक्षर कराए गए।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार 16 एवं 20 जनवरी 2026 को पंचायत भवन जाकर अभिलेखों का परीक्षण किया गया, जिसमें प्रस्तावों की प्रक्रिया संदिग्ध पाई गई। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि दिनांक 17.10.2025 के प्रस्ताव क्रमांक 2 तथा दिनांक 13.11.2025 के प्रस्ताव क्रमांक 1 एवं 2 को निरस्त किया जाए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि निर्माण कार्य पर रोक लगाने हेतु आवेदन दिए जाने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल निर्माण कार्य पर रोक लगाने, दोषी सरपंच, सचिव एवं उपसरपंच के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की मांग की है। मामले ने पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।